Published 2026-07-13
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Abstract
प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक युवा विद्यार्थियों के विकास में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। छोटी आयु में बच्चों का मस्तिष्क स्पंज की भाँति होता है, जो अपने आसपास के वातावरण तथा जीवन के विभिन्न आयामों से निरंतर ज्ञान और अनुभव ग्रहण करता है। शिक्षक का दायित्व केवल कक्षा में बच्चों को विषयगत ज्ञान प्रदान करना ही नहीं होता, बल्कि उनके समग्र विकास में योगदान देना भी होता है।
बच्चों के विकास में माता-पिता के बाद शिक्षक का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। शिक्षक बच्चों के नैतिक मूल्यों, व्यवहार, दृष्टिकोण तथा व्यक्तित्व के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यही कारण है कि अभिभावक विद्यालय और शिक्षक का चयन करते समय केवल उनकी शैक्षिक योग्यता को ही नहीं देखते, बल्कि यह भी विचार करते हैं कि वे बच्चों के समग्र विकास में कितना योगदान दे सकते हैं।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 प्राथमिक स्तर के शिक्षकों की तैयारी और गुणवत्ता पर विशेष बल देती है। यह क्षेत्र राष्ट्रीय शिक्षा नीति का एक प्रमुख केंद्रबिंदु है, जो वर्तमान समय की आवश्यकता भी है। प्राथमिक शिक्षा विद्यार्थी के जीवन की आधारशिला होती है और इस आधारशिला को सुदृढ़ बनाने वाले शिल्पकार प्राथमिक शिक्षक ही होते हैं।
अतः अपने उत्तरदायित्वों का प्रभावी निर्वहन करने के लिए प्राथमिक शिक्षकों का समय-समय पर प्रशिक्षण अत्यंत आवश्यक है। इस संदर्भ में सेवापूर्व (Pre-service) तथा सेवाकालीन (In-service) प्रशिक्षण दोनों को विशेष महत्व दिया जाना चाहिए, ताकि शिक्षक बदलती शैक्षिक आवश्यकताओं, नवीन शिक्षण विधियों तथा समकालीन चुनौतियों के अनुरूप स्वयं को विकसित कर सकें।
प्रस्तुत लेख में प्राथमिक शिक्षक, उनसे अपेक्षित विशिष्ट गुणों एवं कौशलों तथा इन गुणों के विकास की आवश्यकता और महत्ता पर प्रकाश डालने का प्रयास किया गया है।