Vol. 48 No. 1 (2024): प्रा‍थमिक शिक्षक
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भाषा को बहने दीजिए

कुमुद पुरोहित
व्याख्याता, शिक्षा विभाग, मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय, उदयपुर, राजस्थान – 313001

Published 2026-07-13

How to Cite

पुरोहित क. (2026). भाषा को बहने दीजिए. प्राथमिक शिक्षक, 48(1), p.71-77. https://ejournals.ncert.gov.in/index.php/pp/article/view/5447

Abstract

प्रस्तुत आलेख राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की अनुशंसाओं के आलोक में भारत की बहुभाषायी विपुलता एवं विविधता को कक्षाओं में पोषित करने की आवश्यकता पर चर्चा करता है। यह आलेख बच्चों में ज्ञान, समझ एवं कौशलों के अर्जन हेतु उनके द्वारा बोली जाने वाली भाषा में अभिव्यक्ति एवं संवाद के महत्व को भी रेखांकित करता है।

बच्चों के लिए अपनी भाषा में विचार व्यक्त करना, अनुभव साझा करना तथा संवाद स्थापित करना सीखने की प्रक्रिया को अधिक सहज, सार्थक और प्रभावी बनाता है। मातृभाषा अथवा स्थानीय भाषा में शिक्षण बच्चों को अपने परिवेश, संस्कृति तथा सामाजिक अनुभवों से जोड़ता है, जिससे उनका अधिगम अधिक गहन और स्थायी बनता है।

विलुप्त होती भाषाओं के संरक्षण तथा उनमें निहित लोकज्ञान, परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने के लिए भी यह आवश्यक है कि कक्षाओं में बच्चों की भाषाओं को सम्मान और स्थान मिले। बच्चों की भाषाओं का निर्बाध एवं स्वतंत्र प्रयोग न केवल उनकी भाषायी पहचान को सुदृढ़ करता है, बल्कि भाषायी विविधता के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

अतः कक्षाओं में बहुभाषिकता को प्रोत्साहित करना, बच्चों की भाषाओं को सीखने-सिखाने की प्रक्रिया का अभिन्न अंग बनाना तथा भाषायी विविधता को शैक्षिक संसाधन के रूप में स्वीकार करना समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है।