Published 2026-07-13
How to Cite
Abstract
जीवन की जटिल परिस्थितियों में प्रतिदिन हमारे समक्ष अनेक समस्यात्मक स्थितियाँ उत्पन्न होती रहती हैं। इन परिस्थितियों में व्यक्ति के लिए अपनी क्षमताओं एवं कमियों के प्रति जागरूक होना आवश्यक है। तभी वह इन चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना करने हेतु स्वयं को सक्षम बना सकता है।
प्रत्येक व्यक्ति के लिए स्व-जागरूक होना अत्यंत आवश्यक है। यदि बच्चों में स्व-जागरूकता के विकास की प्रक्रिया जीवन के शुरुआती वर्षों में ही प्रारंभ कर दी जाए, तो इसके आधार पर वे अपने बारे में बेहतर निर्णय लेने में सक्षम हो सकते हैं। वे अपनी क्षमताओं और सीमाओं को समझते हुए चुनौतियों का सामना कर पाते हैं तथा अपने समक्ष उपस्थित अवसरों का पूर्ण उपयोग कर सकते हैं। इससे उनका जीवन सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ता है।
स्व-जागरूकता की यह प्रक्रिया शिक्षकों के मार्गदर्शन में अधिक सहज, सुगम एवं प्रभावी बन सकती है। शिक्षक बच्चों को आत्मचिंतन, आत्म-अभिव्यक्ति तथा आत्म-मूल्यांकन के अवसर प्रदान करके उनमें स्व-जागरूकता का विकास कर सकते हैं।
प्रस्तुत शोध-लेख बुनियादी स्तर (3–8 वर्ष) के बच्चों में स्व-जागरूकता के विकास के लिए शिक्षकों की भूमिका का विवेचन करता है तथा इस दिशा में अपनाई जा सकने वाली शैक्षिक प्रक्रियाओं और रणनीतियों पर प्रकाश डालता है।