Vol. 47 No. 4 (2023): प्राथमिक शिक्षक
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वर्तमान परिप्रेक्ष्य में सीखने की मिश्रित पद्धति

गौरी शर्मा
सहायक प्राध्यापक, शिक्षा विभाग, महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा, महाराष्ट्र – 442001

Published 2026-07-13

How to Cite

शर्मा ग. (2026). वर्तमान परिप्रेक्ष्य में सीखने की मिश्रित पद्धति. प्राथमिक शिक्षक, 47(4), p.101-108. https://ejournals.ncert.gov.in/index.php/pp/article/view/5433

Abstract

प्रस्तुत आलेख वर्तमान परिप्रेक्ष्य में सीखने की मिश्रित पद्धति (Blended Learning) के महत्व को रेखांकित करता है। मिश्रित पद्धति कक्षा-कक्ष शिक्षण और ऑनलाइन शिक्षण का उद्देश्यपूर्ण संयोजन है।

सीखने की मिश्रित प्रणाली के अंतर्गत परंपरागत एवं ऑनलाइन शिक्षण दोनों की कमियों को दूर करते हुए विद्यार्थियों में अधिकतम अधिगम परिणाम प्राप्त करने का प्रयास किया जाता है। इसके लिए शिक्षक परंपरागत शिक्षण में आधुनिक सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी का समावेश करते हैं तथा शिक्षण प्रक्रिया में इस प्रकार परिवर्तन लाते हैं कि दोनों पद्धतियों के गुणों का समन्वय हो सके।

मिश्रित शिक्षण का उद्देश्य विद्यार्थियों को सीखने के बेहतर अवसर और विकल्प प्रदान करना है, ताकि वे अपनी आवश्यकताओं, गति और रुचियों के अनुसार अधिगम कर सकें। साथ ही, यह प्रत्यक्ष कक्षा-कक्ष शिक्षण तथा ऑनलाइन शिक्षण दोनों की सीमाओं को कम करने का प्रयास करता है।

इस प्रकार मिश्रित शिक्षण विद्यार्थियों को अधिक लचीला, प्रभावी और शिक्षार्थी-केंद्रित अधिगम अनुभव प्रदान करता है तथा शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बनकर उभरता है (यू.जी.सी., 2021)।