Vol. 47 No. 4 (2023): प्राथमिक शिक्षक
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प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा : महत्व एवं चुनौतियाँ

अविनाश कुमार
शोध अध्येता, शिक्षा विभाग, छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर, उत्तर प्रदेश – 208024
रोशनी यादव
छात्रा (एम.एड.), शिक्षा विभाग, छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर, उत्तर प्रदेश – 208024
गोपाल सिंह
सहायक आचार्य, शिक्षा विभाग, छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर, उत्तर प्रदेश – 208024।

Published 2026-07-13

How to Cite

कुमार अ., यादव र., & सिंह ग. (2026). प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा : महत्व एवं चुनौतियाँ. प्राथमिक शिक्षक, 47(4), p.5-11. https://ejournals.ncert.gov.in/index.php/pp/article/view/5423

Abstract

इस शोध का उद्देश्य प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा (ई.सी.सी.ई.) से संबंधित चुनौतियों एवं महत्व का अन्वेषण राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (एन.ई.पी.) के संदर्भ में करना है, जिसमें पूर्व में बनी शिक्षा नीतियों की समीक्षा, पाठ्यक्रम तथा शिक्षणशास्त्र में परिवर्तन के आधार को भी ध्यान में रखा गया है।

प्रारंभिक बाल्यावस्था बच्चों के मानसिक विकास के लिए एक महत्वपूर्ण समयावधि है, जिसमें भाषा, गत्यात्मक कौशल, मनोसामाजिक, संज्ञानात्मक तथा सीखने की क्षमता का विकास शामिल है।

प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा का उद्देश्य बच्चों के शारीरिक विकास, मनोसामाजिक, भावनात्मक एवं नैतिक विकास, संज्ञानात्मक विकास, भाषा एवं साक्षरता विकास, सौंदर्यबोध तथा सांस्कृतिक विकास से संबंधित क्षमताओं का संवर्धन करना है। साथ ही, यह सीखने की सकारात्मक आदतों के विकास पर भी बल देती है।

राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा—बुनियादी स्तर (एन.सी.एफ.-एफ.एस.) के अनुरूप, प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा बच्चों के समग्र विकास की आधारशिला मानी गई है।

यह शोध-पत्र प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा नीति के महत्व तथा इसके प्रभावी क्रियान्वयन में आने वाली चुनौतियों पर प्रकाश डालता है।