Published 2026-07-13
How to Cite
Abstract
शिक्षा किसी भी राष्ट्र की सामाजिक, सांस्कृतिक एवं आर्थिक उन्नति की आधारशिला है। यह व्यक्ति के सर्वांगीण विकास के साथ-साथ समाज की समावेशिता, समानता और प्रगतिशीलता को भी सुनिश्चित करती है। किंतु जब कोई विद्यार्थी विद्यालय से अनुपस्थित रहता है अथवा औपचारिक शिक्षा प्रणाली को बीच में ही छोड़ देता है, तो यह न केवल उस बच्चे के भविष्य को प्रभावित करता है, बल्कि व्यापक सामाजिक-आर्थिक विकास पर भी नकारात्मक प्रभाव डालता है।
यह अध्ययन उत्तर प्रदेश के ग्रामीण परिवेश वाले संत कबीर नगर जनपद के परिषदीय विद्यालयों में विद्यार्थियों की अनुपस्थिति एवं ड्रॉपआउट की स्थितियों का यथार्थ अध्ययन करता है। इस अध्ययन का मुख्य उद्देश्य विभिन्न विद्यालयों में से एक प्रयोग विद्यालय में विद्यार्थियों की अनुपस्थिति एवं ड्रॉपआउट के सामाजिक-सांस्कृतिक तथा विद्यालयी कारणों की पहचान करना है।
अध्ययन से प्राप्त निष्कर्षों में यह स्पष्ट होता है कि गरीबी, माता-पिता की अशिक्षा, विद्यालयों में आधारभूत सुविधाओं का अभाव, बाल श्रम, बालिकाओं के प्रति भेदभाव और शिक्षा के प्रति समाज का उदासीन दृष्टिकोण ऐसे प्रमुख कारण हैं, जो बच्चों की नियमित उपस्थिति और शिक्षण में निरंतरता को बाधित करते हैं।
विशेषकर बालिकाओं की स्थिति और अधिक संवेदनशील पाई गई, जहाँ सामाजिक रूढ़ियाँ और पारिवारिक प्रतिबद्धताएँ उन्हें शिक्षा से वंचित कर रही हैं।
यह अध्ययन न केवल समस्याओं की पहचान करता है, बल्कि समावेशी, व्यावहारिक और नीति-आधारित समाधानों की भी संस्तुति करता है। अध्ययन के निष्कर्षों का उपयोग शैक्षिक योजना निर्माण, सरकारी हस्तक्षेप, विद्यालय-स्तरीय कार्यान्वयन और समुदाय-जागरूकता कार्यक्रमों में किया जा सकता है।
यह शोध शिक्षा के सार्वभौमीकरण, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की लक्ष्योन्मुखता और ‘मुक्त एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009’ के प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में एक प्रायोगिक एवं साक्ष्य-आधारित योगदान प्रस्तुत करता है।