खंड 48 No. 2 (2024): प्राथमिक शिक्षक
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पर्यावरण अध्ययन शिक्षण को प्रभावी एवं रोचक कैसे बनाया जाए?

सुनीता मुर्डिया
एसोसिएट प्रोफेसर, लोकमान्य तिलक शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय, जनार्दन राय नागर राजस्थान विद्यापीठ (डीम्ड-टू-बी विश्वविद्यालय), डबोक, उदयपुर, राजस्थान – 313002

प्रकाशित 2026-07-13

सार

बच्चे जिस ज्ञान का सृजन स्वयं सक्रिय होकर करते हैं, वह उनके मस्तिष्क में अधिक स्थायी रूप से स्थापित हो जाता है। बच्चों को ज्ञान प्राप्त करने के लिए सक्रिय बनाने हेतु कौन-सी शिक्षण विधि का प्रयोग किया जाए, यह सदैव विचार का विषय रहा है।

प्रस्तुत आलेख में पर्यावरण अध्ययन के शिक्षण को प्रभावी, रोचक तथा बाल-केंद्रित बनाने हेतु विभिन्न शिक्षण विधियों का वर्णन किया गया है। इनमें कहानी-विधि, भूमिका-निर्वहन (Role Play), परियोजना (Project) विधि, फ्लिप्ड लर्निंग, प्रयत्न एवं भूल (Trial and Error) तथा कठपुतली विधि जैसी शिक्षण रणनीतियाँ शामिल हैं।

इसके अतिरिक्त, खेल-आधारित अधिगम (Play-based Learning), क्रॉस-ओवर लर्निंग, सहकारी अधिगम (Cooperative Learning), साइंस टेक्स्ट कार्ड आदि के उपयोग पर भी प्रकाश डाला गया है। लेख में यह बताया गया है कि शिक्षक इन विधियों का प्रयोग कक्षा में किस प्रकार कर सकते हैं ताकि विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित हो सके।

इन शिक्षण विधियों में विद्यार्थी अधिगम-शिक्षण प्रक्रिया के सक्रिय भागीदार बनते हैं। परिणामस्वरूप वे विभिन्न संकल्पनाओं को केवल रटते नहीं हैं, बल्कि उन्हें समझकर सीखते हैं और अपने अनुभवों के साथ जोड़ते हैं। इस प्रकार अधिगम अधिक अर्थपूर्ण और स्थायी बन जाता है।

इन विधियों के प्रभावी उपयोग के लिए शिक्षक शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया का आयोजन इस प्रकार करते हैं कि विद्यार्थियों में समस्या-समाधान, चिंतन, रचनात्मकता, अवलोकन, कल्पनाशक्ति, तर्कशक्ति तथा निर्णय-निर्धारण जैसे महत्वपूर्ण गुणों का स्वाभाविक रूप से विकास हो सके।

फलस्वरूप पर्यावरण अध्ययन विषय का अधिगम अधिक प्रभावी, रुचिकर एवं अनुभवसमृद्ध बन जाता है तथा विद्यार्थी अपने परिवेश को बेहतर ढंग से समझने और उससे सार्थक रूप से जुड़ने में सक्षम होते हैं।