खंड 48 No. 1 (2024): प्रा‍थमिक शिक्षक
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प्राथमिक स्तर पर गणितीय अधिगम का भाषायी पहलू

डोरी लाल
सह-आचार्य, शिक्षक-प्रशिक्षण एवं अनौपचारिक शिक्षा विभाग (आई.ए.एस.ई.), शिक्षा संकाय, जामिया मिलिया इस्लामिया (केंद्रीय विश्वविद्यालय), नई दिल्ली – 110025

प्रकाशित 2026-07-13

सार

अमूमन जब भी हम गणित शिक्षण की बात करते हैं, तो हमारे मानस पटल पर गणित के चिह्न, सूत्र, आकृतियाँ तथा गणित की बोझिल कक्षा-कक्ष की छवि उभर आती है। जब भी हम गणित शिक्षण की चुनौतियों की चर्चा करते हैं, तो प्रायः गणित को पढ़ने-पढ़ाने की विधियों एवं प्रविधियों अथवा उसके मूल्यांकन के तरीकों पर ही विचार-विमर्श होता है। इन सबके बीच हम अक्सर यह भूल जाते हैं कि गणित शिक्षण के दायरे में भाषा की भी अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

प्रत्येक वर्ष अनेक बच्चे गणित से भयभीत होते हैं और उनका यह भय एक समय के बाद उन्हें गणित विषय छोड़ने के लिए भी मजबूर कर देता है (राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा, 2005 एवं 2023)। हम सामान्यतः कुछ सीमित कारणों पर ही चर्चा करते रहते हैं तथा उनके समाधान खोजने का प्रयास करते हैं, जबकि भाषा से उत्पन्न होने वाली समस्याएँ प्रायः उपेक्षित रह जाती हैं।

भाषा ज्ञान-निर्माण की एक महत्वपूर्ण कड़ी है। यह हमें अपने विचारों को एक-दूसरे तक पहुँचाने और साझा करने में सहायता करती है। गणित के सीखने-सिखाने की प्रक्रिया को समझने के लिए भाषायी समस्याओं की उपेक्षा नहीं की जा सकती। गणितीय समझ के विकास के साथ-साथ गणितीय भाषा का विकास भी समान रूप से आवश्यक है।

गणितीय भाषा व्यापक रूप से सटीक (सूक्ष्म भेदों को स्पष्ट करने में सक्षम), संक्षिप्त (कम शब्दों में स्पष्ट अभिव्यक्ति करने में सक्षम) तथा शक्तिशाली (जटिल विचारों को सहजता से व्यक्त करने में सक्षम) होनी चाहिए। गणितीय अवधारणाओं का प्रभावी शिक्षण केवल गतिविधियों पर दक्षता प्राप्त करने का परिणाम नहीं है, बल्कि यह इस बात पर भी निर्भर करता है कि शिक्षक भाषा तथा अन्य प्रतीकात्मक निरूपणों का विकास करने, विद्यार्थियों के पूर्व अनुभवों से संबंध स्थापित करने तथा उनसे संबंधित अमूर्त अवधारणाओं एवं नियमों का निर्माण करने में कितने सफल हैं।

गणित शिक्षक कक्षा में किस प्रकार की भाषा का प्रयोग कर रहे हैं, क्या यह भाषा गणित शिक्षण में बाधा उत्पन्न कर रही है अथवा शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया को अधिक सुदृढ़ बना रही है— इन सभी पहलुओं पर प्रस्तुत लेख में विचार करने का प्रयास किया गया है।