प्रकाशित 2026-07-13
##submission.howToCite##
सार
स्कूली शिक्षा बीच में ही छोड़ने (ड्रॉपआउट) की समस्या आज भी एक गंभीर चुनौती बनी हुई है। यह अध्ययन उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जनपद के एक प्राथमिक विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों के उन अभिभावकों पर केंद्रित है, जिन्होंने स्वयं बाल्यावस्था में पढ़ाई अधूरी छोड़ दी थी।
साक्षात्कार के माध्यम से यह स्पष्ट हुआ कि शिक्षा से वंचित होने के पीछे मुख्य कारण आर्थिक तंगी, अशिक्षित माता-पिता, पारिवारिक कलह और शिक्षा के प्रति जागरूकता की कमी रही है।
हालाँकि अब अधिकांश अभिभावक अपनी पिछली भूलों से सबक लेकर अपने बच्चों को स्कूल से बाहर नहीं होने देने का संकल्प लेते हैं। 98.5 प्रतिशत अभिभावकों ने शिक्षा के महत्व को स्वीकारते हुए बच्चों की निरंतर पढ़ाई सुनिश्चित करने का वचन दिया।
यह शोध दर्शाता है कि जब सरकारी प्रयासों जैसे शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 व निपुण भारत अभियान के साथ सामाजिक चेतना और पारिवारिक प्रतिबद्धता जुड़ती है, तब ड्रॉपआउट जैसी समस्याओं को जड़ से समाप्त किया जा सकता है।