प्रकाशित 2026-07-13
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सार
भारत में कोविड-19 महामारी के बाद सामान्य होते हालातों में शिक्षा व्यवस्था में डिजिटल उपकरणों और तकनीकों का चलन काफी बढ़ा है। इसके साथ ही नवाचार के रूप में डिजिटल पेडागॉजी की अवधारणा हम सब के सामने आई है। हालाँकि, इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि महामारी के समय में अचानक से पूरी शिक्षा व्यवस्था के ऑनलाइन प्रकार में परिवर्तित हो जाने के कारण शिक्षा के अलग-अलग स्तरों पर काफी सारी समस्याएँ प्रकाश में आई हैं। निश्चित रूप से इन समस्याओं को डिजिटल पेडागॉजी के सफल उपयोग द्वारा कम किया जा सकता है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 ने भी आधिकारिक रूप से भारतीय शिक्षा प्रणाली में (प्राथमिक से परास्नातक) में डिजिटल पेडागॉजी के रोल को भली प्रकार से समझा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और केंद्रीय बजट 2022–2023 में इसके प्रचार-प्रसार और क्रियान्वयन के लिए विशेष प्रावधान भी किए गए हैं। वर्तमान समय में शिक्षा के क्षेत्र में जिस प्रकार से डिजिटल उपकरणों और तकनीकों का चलन तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में डिजिटल पेडागॉजी शैक्षिक दृष्टिकोण से सावधानीपूर्वक और सही डिजिटल उपकरणों और तकनीकों के चुनाव करने एवं अन्य लाभकारी शैक्षणिक तकनीकों (गंभीर चिंतन, सहयोगात्मक अधिगम एवं व्यक्तिगत अधिगम इत्यादि) के मिश्रण के साथ शिक्षण-अधिगम की प्रक्रिया को सशक्त करने में शिक्षकों की सहायता करती है। डिजिटल पेडागॉजी डिजिटल उपकरणों और तकनीकों का शिक्षण-अधिगम की प्रक्रिया में समझदारीपूर्वक प्रयोग करने पर बल देती है और इन उपकरणों का अधिगम पर कैसा प्रभाव पड़ रहा है? इस बात की निगरानी भी करती है। यह एक ऐसा नवाचार है जिसे शिक्षण-अधिगम की प्रक्रिया में उपयोग में लाया जाए तो इससे शिक्षक, विद्यार्थी और संपूर्ण कक्षा को नए अधिगम अनुभव प्राप्त होते हैं। जहाँ सीखने के लिए नई संभावनाएँ उत्पन्न होती हैं जिसमें अधिगम सिर्फ विद्यार्थियों या शिक्षकों तक सीमित न रहकर सामूहिक होता है। इस लेख में शोधकर्ता ने कोविड-19 महामारी के बाद से प्रचलित डिजिटल पेडागॉजी शैक्षणिक नवाचार को सरल शब्दों में समझाने और वर्तमान में इसकी आवश्यकता और प्रासंगिकता को स्पष्ट करने का प्रयास किया है।