खंड 48 No. 2 (2024): प्राथमिक शिक्षक
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विद्यालयों में नामांकन, ठहराव और ड्रॉपआउट के कारणों का अध्ययन : खलीलाबाद ब्लॉक के विशेष संदर्भ में

आराधना गोस्वामी
प्रवक्ता (समाज कार्य), जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (DIET), संत कबीर नगर, उत्तर प्रदेश – 272175

प्रकाशित 2026-07-13

सार

एक अच्छी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए सबसे महत्वपूर्ण है शिक्षा की जड़ों का मजबूत होना। समाज में शिक्षा की जड़ प्राथमिक शिक्षा को माना जाता है। यदि प्राथमिक शिक्षा को सुदृढ़ बनाना है, तो वर्तमान में प्राथमिक शिक्षा जिन चुनौतियों का सामना कर रही है, उनका उपयुक्त समाधान करना आवश्यक होगा।

भारत द्वारा वर्ष 2015 में अपनाए गए सतत विकास एजेंडा 2030 के लक्ष्य 4 (SDG-4) के अनुसार वर्ष 2030 तक सभी के लिए समावेशी, समान एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस प्रकार के महत्वाकांक्षी लक्ष्य की प्राप्ति के लिए शिक्षा प्रणाली के समक्ष उपस्थित विभिन्न चुनौतियों का समाधान करना आवश्यक है।

जब प्राथमिक शिक्षा की बात आती है, तो नामांकन में वृद्धि, विद्यालयों में विद्यार्थियों के ठहराव (Retention) को बनाए रखना तथा ड्रॉपआउट की समस्या को नियंत्रित करना अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाता है। एक ओर कोविड-19 महामारी के बाद विद्यालयों में नामांकन के आँकड़ों में वृद्धि देखी गई है, वहीं दूसरी ओर विद्यालय छोड़ने की प्रवृत्ति भी चिंता का विषय बनी हुई है।

प्राथमिक शिक्षा को गुणवत्तापूर्ण बनाने के लिए विद्यालयों की सुदृढ़ अवसंरचना, पर्याप्त संख्या में शिक्षक, अनुकूल शिक्षण-अधिगम वातावरण तथा विद्यार्थियों की आधारभूत आवश्यकताओं की संतुष्टि सुनिश्चित करना आवश्यक है।

इन्हीं उपायों के माध्यम से प्राथमिक शिक्षा अपने निर्धारित उद्देश्यों तथा महत्वाकांक्षी लक्ष्यों की प्राप्ति कर सकती है और देश के समग्र शैक्षिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है।