प्रकाशित 2026-07-13
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सार
विद्यार्थी जीवन में करियर परामर्श की अहम भूमिका है। स्वतंत्रता के 77 वर्ष बीत जाने के बाद भी भारतीय शिक्षा व्यवस्था के अंतर्गत विद्यार्थियों को पर्याप्त करियर संबंधी परामर्श नहीं मिल पा रहा है, जिस कारण अनेक विद्यार्थी अपने करियर पथ से भटक जाते हैं।
विगत कुछ वर्षों से सरकारों द्वारा विद्यालयों में निर्देशन एवं परामर्श सेवाओं के अंतर्गत परामर्शदाताओं की नियुक्ति की गई है, जिससे विद्यार्थियों में करियर के प्रति समझ विकसित हो सके, वे अपनी रुचि एवं क्षमता के अनुसार करियर का चयन कर सकें तथा करियर के अनुरूप शिक्षा ग्रहण कर सकें।
परंतु प्रश्न यह है कि क्या इन प्रयासों से विद्यार्थियों में अपेक्षित बदलाव आ रहा है? क्या विद्यार्थी अपनी इच्छानुसार करियर का चयन कर पा रहे हैं? क्या विद्यालयों में नियुक्त परामर्शदाता विद्यार्थियों को इस दिशा में प्रभावी करियर परामर्श प्रदान कर पा रहे हैं?
सरकारों को यह समझना होगा कि विद्यालयों में केवल परामर्शदाताओं की नियुक्ति कर देने से समस्याओं का समाधान नहीं होगा। इसके लिए और अधिक प्रयास करने होंगे, जैसे विद्यालयों में परामर्शदाताओं की संख्या बढ़ाना तथा उन्हें करियर परामर्श से संबंधित आवश्यक कौशलों का प्रशिक्षण प्रदान करना।
करियर परामर्श की प्रभावशीलता इस बात पर निर्भर करती है कि परामर्शदाता विद्यार्थियों की रुचियों, क्षमताओं, आकांक्षाओं तथा बदलती रोजगार संभावनाओं को समझते हुए उन्हें उचित मार्गदर्शन प्रदान कर सकें।
अतः आज का विद्यार्थी ही कल का सुनहरा भविष्य है। यदि उसे सही दिशा और मार्गदर्शन प्राप्त नहीं होगा, तो यह चिंता का विषय है। प्रस्तुत लेख इसी संदर्भ में करियर परामर्श की आवश्यकता, वर्तमान स्थिति तथा उससे जुड़ी चुनौतियों पर प्रकाश डालता है।