खंड 47 No. 3 (2023): प्राथमिक शिक्षक
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पर्यावरण संरक्षण में विधायिका की भूमिका

पुष्प लता वर्मा
सह-आचार्य, विज्ञान एवं गणित शिक्षा विभाग, राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद, नई दिल्ली – 110016

प्रकाशित 2026-07-13

सार

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एन.ई.पी.) 2020 में पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास को विद्यालयी पाठ्यक्रम में समाहित करने पर ज़ोर दिया गया है। पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता और संवेदनशीलता का भाव भारत के प्रत्येक नागरिक में जागृत करने के लिए इस विषय का अध्ययन छात्रों के लिए अत्यंत आवश्यक है।

हमारे शिक्षकों को भी अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करना होगा। इसके लिए यह आवश्यक है कि शिक्षक-प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भी इस विषय को शामिल किया जाए। सतत विकास लक्ष्य 13 (SDG-13) में भी जलवायु कार्रवाई (Climate Action) पर विशेष बल दिया गया है।

हमारे संविधान के अनुच्छेद 21 के अंतर्गत ‘जीवन का अधिकार’ केवल जीवित रहने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसके अंतर्गत प्रदूषण-मुक्त जल और वायु सहित सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अधिकार भी सम्मिलित है।

संविधान के विभिन्न अनुच्छेदों में भारत के प्रत्येक नागरिक को पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रेरित किया गया है। उदाहरणस्वरूप, वनों, झीलों, नदियों और वन्य जीवों सहित प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा एवं संवर्धन करना तथा समस्त जीव-जंतुओं के प्रति दया का भाव रखना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य माना गया है।