खंड 47 No. 3 (2023): प्राथमिक शिक्षक
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खेल गतिविधियों का विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर प्रभाव

शिव नंदन सिंह
शोधार्थी (एम.एड.), शिक्षा एवं सहबद्ध विज्ञान संकाय, महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय, बरेली
नीतू पटेल
शोधार्थी (एम.एड.), शिक्षा एवं सहबद्ध विज्ञान संकाय, महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय, बरेली

प्रकाशित 2026-07-13

सार

खेल विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास अर्थात सामाजिक, संवेगात्मक, शारीरिक और संज्ञानात्मक पक्षों के विकास में सहायक होते हैं। ये विद्यार्थियों को खेल के मैदान में अपने सहपाठियों के साथ-साथ अन्य विद्यार्थियों, जिनकी सामाजिक, आर्थिक व सांस्कृतिक पृष्ठभूमि अलग-अलग होती है, से भी बातचीत करने का अवसर देते हैं।

जिसके फलस्वरूप वे एक-दूसरे की भाषा, रहन-सहन व संस्कृति आदि के बारे में जानते हैं। वे एक-दूसरे की भावनाओं, संवेगों आदि की इज्जत करना सीखते हैं और आवश्यकता पड़ने पर विषम परिस्थितियों में एक-दूसरे की सहायता भी करते हैं।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में भी अधिगम को खेल के साथ एकीकृत करके सिखाने पर ज़ोर दिया गया है, जिससे विद्यार्थियों में अधिगम को प्रभावी व रुचिकर बनाने के साथ-साथ स्व-अनुशासन, स्व-निर्देशन, कुशल नागरिकता तथा टीम भावना जैसे कौशलों का विकास हो सके।

प्रस्तुत आलेख में यह समझने की कोशिश की गई है कि खेल तथा खेल-समावेशित शिक्षण एवं अधिगम विधियाँ बच्चों के सर्वांगीण विकास में किस प्रकार महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन कर रही हैं।