खंड 47 No. 2 (2023): प्राथमिक शिक्षक
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मनोदर्पण : एक पहल

रुचि शुक्ला
असिस्टेंट प्रोफेसर, मनोदर्पण सेल, डी.ई.पी.एफ.ई., राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद, नई दिल्ली।
सुष्मिता चक्रवर्ती
असिस्टेंट प्रोफेसर, मनोदर्पण सेल, डी.ई.पी.एफ.ई., राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद, नई दिल्ली।

प्रकाशित 2026-07-13

सार

मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है, जो सामाजिक संपर्क से अपनी पहचान, व्यक्तित्व आदि का निर्माण करने के लिए अपने अनुभवों का उपयोग करता है। जब यह सामाजिक संपर्क नकारात्मक रूप से उन्मुख होता है या इसे कम कर दिया जाता है, तो इसके मनोवैज्ञानिक प्रभाव दिखाई देते हैं, जो अकेलेपन की भावनाओं से लेकर प्रमुख मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं, जैसे— अवसाद आदि के रूप में सामने आते हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यू.एच.ओ.) के यूरोपीय मंत्रिस्तरीय सम्मेलन (2005) में मानसिक स्वास्थ्य का समर्थन किया गया और यह कहा गया कि “मानसिक स्वास्थ्य के बिना कोई स्वास्थ्य नहीं”। यह कथन इस बात को दोहराता है कि मानसिक स्वास्थ्य की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण और अपरिहार्य है। मानसिक स्वास्थ्य कल्याण की एक ऐसी अवस्था है, जिसमें व्यक्ति दैनिक जीवन के तनाव का सामना करने में सक्षम होता है, समुदाय में उत्पादक बना रहता है और उसमें योगदान देता है।

वर्ष 2020 में दुनिया में आई महामारी इतनी संक्रामक थी कि इसने एक ही छत के नीचे रहने वाले लोगों को शारीरिक रूप से सुरक्षित रखने के लिए सामाजिक दूरी बनाए रखने और स्वयं को अलग कमरे में बंद करने के लिए मजबूर कर दिया। इस ज़बरन अलगाव और सामाजिक संपर्क के नुकसान ने उम्र, आर्थिक और सामाजिक रूप से कमज़ोर लोगों के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित किया।

दुनिया भर की सरकारों ने कोविड-19 वायरस के प्रसार को रोकने के लिए अनेक उपाय किए, लेकिन बहुत कम लोगों ने इस महामारी के मानसिक स्वास्थ्य संबंधी प्रभावों को समझा और इस दिशा में कार्य किया।

भारत सरकार वैश्विक महामारी कोविड-19 की पूरी अवधि के दौरान अपने नागरिकों की देखभाल करने में सक्रिय रही है। महामारी के संक्रमण से बचाने के लिए अपने नागरिकों को मुफ्त टीके प्रदान करने के अलावा, सरकार ने उनके मानसिक स्वास्थ्य को प्रबंधित करने और बनाए रखने में सहायता करने की दिशा में भी प्रयास किए।

‘मनोदर्पण’ सरकार द्वारा किए गए अनेक प्रयासों में से एक ऐसा ही महत्वपूर्ण कदम था। महामारी से उत्पन्न होने वाले अलगाव के मानसिक स्वास्थ्य संबंधी निहितार्थों की कल्पना करते हुए इस कार्यक्रम को महामारी के शुरुआती चरणों, अर्थात जुलाई 2020 में प्रारंभ किया गया था।