खंड 47 No. 1 (2023): प्राथमिक शिक्षक
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हिंदी भाषा और भविष्य की राह

अन्नू इंदौरा
शोधार्थी एवं सहायक प्रोफेसर (हिंदी), राजकीय कन्या महाविद्यालय, गुरुग्राम, हरियाणा।

प्रकाशित 2026-07-13

सार

हिंदी भाषा भारत राष्ट्र की भाषा है। यह भाषा भूगोल की दृष्टि से भारत के एक-तिहाई से भी अधिक भाग के लोगों द्वारा बोली, समझी और पढ़ी जाती है। यही नहीं, बल्कि भारत जैसे बहुभाषी देश में हिंदी भाषा एकमात्र ऐसी भाषा है जो प्रारंभ से ही भारत देश में चर्चा और विमर्शों की भाषा रही है।

वास्तव में प्रत्येक भाषा-भाषी का अपने क्षेत्र की भाषा के प्रति अपना झुकाव ज़ाहिर करना स्वाभाविक भी है, किंतु देश में हिंदी भाषा की ऐतिहासिक भूमिका और महत्व को देखते हुए उसकी केंद्रीय स्थिति से इनकार नहीं किया जा सकता है।

वर्तमान संदर्भ में यदि बात की जाए तो जो लोग आज के युग को अंग्रेज़ी-प्रधान युग कहते हैं, उन्हें हिंदी भाषा की वास्तविक स्थिति के विषय में भी जानना आवश्यक है। किसी भाषा की स्थिति को जानने का माध्यम उसे बोलने, समझने वाले लोगों की संख्या के साथ उसमें अपना दैनिक, शैक्षिक और व्यावसायिक कार्य करने वालों की संख्या भी होती है।

हिंदी भाषा पर चूँकि वर्षों से वाद-विवाद व संवाद सबसे अधिक होता रहा है, इसलिए हिंदी भाषा की रोजगारपरक संभावनाओं की पड़ताल करना अपने आप में आवश्यक ही नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है।

यह प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि आज यह हिंदी भाषा हमें क्या दे रही है, इसके बिना हम क्या खो देंगे, यह कैसे विश्व के देशों में भारत को एक अलग पहचान दिलाती है आदि प्रश्नों के उत्तर हमें हिंदी भाषा के महत्व और प्रयोग को समझने में सहायक होंगे।