कोरोना महामारी के बाद इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स से प्राथमिक शिक्षा के विद्यार्थियों का अधिगम ह्रास एवं समाधान
प्रकाशित 2026-07-13
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सार
कोविड-19 महामारी के दौरान जहाँ विश्व की अर्थव्यवस्था, स्वास्थ्य एवं शिक्षा व्यवस्था चरमरा गई थी, वहीं भारत के युवाओं को, जो महामारी में शिक्षा से वंचित हो रहे थे, उनके लिए इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स वरदान साबित हुए थे।
वहीं कोविड-19 से पूर्व, प्राथमिक शिक्षा के छात्रों के जो माता-पिता उन्हें मोबाइल, टेलीविज़न एवं लैपटॉप आदि इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स से दूर रहने की सलाह देते थे तथा इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स के अत्यधिक प्रयोग करने पर दंड भी देते थे। साथ ही इनके द्वारा बच्चों के मस्तिष्क एवं शरीर पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों एवं परिणामों पर बच्चों को उनके अभिभावकों द्वारा मार्गदर्शन दिया जाता था।
कोविड-19 महामारी में उन्हीं माता-पिता द्वारा उन्हें इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स प्रदान कराए गए, जिससे छात्र अपने शिक्षकों एवं विद्यालय से जुड़ सकें तथा इसके सकारात्मक परिणाम देखने को मिले थे, जैसे— कोविड-19 के दौरान इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स तथा उपकरणों द्वारा शिक्षा में व्यस्त होने के कारण छात्रों के तनाव में कमी आई थी।
इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स का प्रयोग कुछ हद तक उच्च शिक्षा में तो प्रभावकारी प्रतीत होता है, लेकिन यह प्राथमिक शिक्षा पर पूर्णतः लागू नहीं किया जा सकता, क्योंकि इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स बच्चों की कम उम्र में अधिक दुष्प्रभाव डालते हैं।
इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स सीमित रूप में मिश्रित प्रणाली शिक्षा या ब्लेंडेड शिक्षा (जिसमें विद्यार्थी पाठ्यक्रम का एक भाग कक्षा में पूरा करता है और दूसरा भाग डिजिटल एवं ऑनलाइन माध्यम से अभिभावकों की निगरानी में पूरा करता है) के रूप में प्रयोग किए जा सकते हैं।
कोविड-19 महामारी के दौरान जहाँ विश्व की अर्थव्यवस्था, स्वास्थ्य एवं शिक्षा व्यवस्था चरमरा गई, वहीं भारत के स्कूलों की व्यवस्था इन्हीं इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स के सहारे चलती रही। बच्चे, जो महामारी के कारण शिक्षा से वंचित हो रहे थे, उनके लिए इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स वरदान साबित हुए।