राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के परिप्रेक्ष्य में प्राथमिक स्तर के विद्यार्थियों की बुनियादी साक्षरता और संख्याज्ञान का वर्णनात्मक अध्ययन
प्रकाशित 2026-07-13
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सार
प्रस्तुत शोध अध्ययन आई.आई.टी.ई. गांधीनगर द्वारा वित्तपोषित परियोजना के तहत संपन्न किया गया है। इस परियोजना के अंतर्गत राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में सुझाए गए प्राथमिक (बुनियादी एवं प्रारंभिक स्तर) के विद्यार्थियों में बुनियादी साक्षरता और संख्याज्ञान पर एक व्यापक और वर्णनात्मक अध्ययन किया गया है।
यह शोध शिक्षा के महत्वपूर्ण आयामों को गहराई से समझने और विद्यार्थियों की प्रारंभिक शैक्षिक नींव को सुदृढ़ करने के लिए एक महत्वपूर्ण प्रयास है। यह शोध विशेष रूप से प्रयागराज जिले के कक्षा 3 के विद्यार्थियों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति और अभिभावकीय शिक्षा के आधार पर उनके बुनियादी साक्षरता और संख्याज्ञान परीक्षण अंकों के बीच अंतर और महत्वपूर्ण संबंधों की जाँच पर केंद्रित है।
इस उद्देश्य की पूर्ति हेतु शोधार्थी ने ‘निपुण’ दिशा-निर्देशों पर आधारित अधिकतम 40 अंकों का एक उपलब्धि परीक्षण तैयार किया। यह परीक्षण तीन खंडों में विभाजित किया गया—
खंड I – पढ़ने के कौशल का आकलन करने के लिए 5 प्रश्न।
खंड II – लेखन कौशल का आकलन करने के लिए 5 प्रश्न।
खंड III – अंकगणितीय कौशल का आकलन करने के लिए 8 प्रश्न।
प्रयागराज जिले के विभिन्न बोर्डों के कक्षा 3 में पढ़ने वाले सत्र 2023–24 के 204 विद्यार्थियों का चयन स्तरीकृत यादृच्छिक विधि का उपयोग करते हुए किया गया और उन पर यह उपलब्धि परीक्षण प्रशासित किया गया।
शोध में प्राप्त आँकड़ों के विश्लेषण के लिए सांख्यिकी तकनीकों का उपयोग किया गया। इस अध्ययन के निष्कर्षों में पाया गया कि विद्यार्थियों के बुनियादी साक्षरता और संख्याज्ञान के औसत अंकों में 0.01 महत्व के स्तर पर कोई सार्थक अंतर नहीं था, जबकि चरों के बीच सह-संबंध सकारात्मक पाया गया।
शोध के अंतिम निष्कर्षों के अनुसार, निम्न सामाजिक-आर्थिक स्थिति और उच्च अभिभावकीय शिक्षा प्राप्त विद्यार्थियों ने अपने समकक्षों की तुलना में अधिक बुनियादी साक्षरता कौशल प्रदर्शित किए।
जबकि उच्च सामाजिक-आर्थिक स्थिति और उच्च अभिभावकीय शिक्षा प्राप्त विद्यार्थियों के बुनियादी संख्याज्ञान कौशल निम्न स्तर वाले विद्यार्थियों की तुलना में अधिक पाए गए।