प्रकाशित 2026-07-13
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सार
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 ने शिक्षा को अधिक आनंददायक, अनुभवजन्य और बाल-केंद्रित बनाने की दिशा में एक नया दृष्टिकोण प्रस्तुत किया है। इस संदर्भ में, कहानी-आधारित शिक्षण-पद्धति एक प्रभावशाली परिवर्तनकारी विकल्प के रूप में उभरती है।
यह पद्धति बच्चों के भाषायी, संज्ञानात्मक, सामाजिक-भावनात्मक और नैतिक विकास में सहायक होती है। कहानियाँ बच्चों की जिज्ञासा, कल्पनाशीलता, रचनात्मकता और संवेदनशीलता को पोषित करती हैं।
प्राथमिक शिक्षक इस प्रक्रिया में केंद्रीय भूमिका निभाते हैं। वे कहानियों के चयन, प्रस्तुति और अनुभवात्मक शिक्षण के माध्यम से बच्चों को प्रेरित करते हैं।
यद्यपि संसाधनों और प्रशिक्षण की कमी जैसी कुछ चुनौतियाँ हैं, परंतु राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020, एन.सी.एफ.-एफ.एस. 2022, निपुण भारत मिशन 2021 तथा जादुई पिटारा जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से इनका समाधान संभव है।
लेख में यह स्पष्ट किया गया है कि कहानी केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि शिक्षण का एक बहुआयामी, समावेशी और सशक्त माध्यम है, जिसे शिक्षक रचनात्मकता और संवेदनशीलता के साथ अपना सकते हैं।
यह पद्धति शिक्षा को अधिक जीवंत और बच्चों के अनुकूल बनाती है।