खंड 49 No. 4 (2025): प्राथमिक शिक्षक
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प्राथमिक विद्यालय के तीसरी कक्षा के बच्चों द्वारा पूर्ण संख्या घटाव का त्रुटि पैटर्न : एक विश्लेषण

चन्द्रा तिवारी
सहायक आचार्या, गार्गी कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय, नई दिल्ली – 110049

प्रकाशित 2026-07-13

सार

गणित की प्रकृति में उपस्थित अमूर्तता, तार्किकता, विशिष्टता, क्रमबद्धता, सत्यता, प्रतीक आदि विशिष्टताओं को सही प्रकार से न समझ पाने और जीवन में गणितीय तरीके से चीजों को न सोच-समझ पाने के कारण इस विषय को एक बड़े विद्यार्थी समूह द्वारा एक अप्रिय आवश्यकता मात्र माना जाता है, जिसे उन्हें 10वीं कक्षा तक इस विषय को पढ़ने की अनिवार्यता होने के कारण किसी भी प्रकार संपन्न करना ही पड़ता है।

यह अनिवार्यता किसी भी प्रकार से विद्यार्थियों की गणित विषय के प्रति दृष्टिकोण को बदलने अथवा उनकी रुचि को बढ़ाने में कारगर साबित नहीं हो पाई है। इस कारण हमारी शिक्षा-व्यवस्था अवश्य ही विचारणीय श्रेणी में आ गई है।

राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा 2005 बताती है कि कक्षा 3 तक आते-आते बच्चों में गणित को न हल कर सकने का भाव आ जाता है। गणित में असफलता और व्यग्रता, गणित पढ़ने की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण है। गणित में असफलता का एक कारण गणित में होने वाली गलतियाँ भी हो सकती हैं।

शिक्षक गलतियों का विश्लेषण कर विद्यार्थियों को गणित सीखने में मदद कर सकते हैं। यह शोध-पत्र गणित में प्राथमिक विद्यालय की कक्षा 3 के विद्यार्थियों द्वारा घटाव करते समय की जाने वाली त्रुटियों के विश्लेषण एवं उनके उपचार की चर्चा करता है।