प्रकाशित 2026-07-13
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सार
मातृभाषा किसी भी बच्चे के संज्ञानात्मक, भाषायी, सामाजिक और भावनात्मक विकास की आधारशिला होती है, जो उसकी सोच, समझ और अभिव्यक्ति को प्रारंभिक दिशा प्रदान करती है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और बुनियादी शिक्षा हेतु राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा 2022 इस तथ्य को स्वीकारते हुए प्रारंभिक शिक्षा में मातृभाषा की भूमिका को केंद्र में रखती हैं।
यह शोध-पत्र बाल मनोविज्ञान के सिद्धांतों और व्यावहारिक अनुभवों के आधार पर यह समझने का प्रयास करता है कि मातृभाषा में शिक्षा देना बच्चों के सीखने की प्रक्रिया को कैसे सहज, प्रभावी और सृजनात्मक बनाता है।
पियाजे, वायगोत्स्की और ब्रूनर जैसे मनोवैज्ञानिकों के विचारों के माध्यम से यह स्पष्ट होता है कि जब बच्चे अपनी परिचित भाषा में सीखते हैं, तो वे अधिक आत्मविश्वास के साथ ज्ञान को आत्मसात करते हैं।
इसमें उन चुनौतियों, अवसरों और शैक्षिक नवाचारों पर भी चर्चा की गई है, जो मातृभाषा आधारित शिक्षण के क्रियान्वयन में सामने आते हैं। मातृभाषा को शिक्षा का माध्यम बनाना न केवल बच्चों के अधिकारों की रक्षा करता है, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता और समानता को भी सुनिश्चित करता है।
यह दृष्टिकोण भाषायी विविधता को सम्मान देते हुए त्रिभाषा सूत्र के माध्यम से बहुभाषिकता, सांस्कृतिक एकता और वैश्विक संवाद को भी सुदृढ़ करता है।
इस प्रकार, यह नीति शिक्षा को स्थानीय अनुभवों से जोड़कर वैश्विक क्षितिज की ओर ले जाने वाली समावेशी एवं दूरदर्शी पहल के रूप में सामने आई है।