Vol. 46 No. 3 (2022): प्राथमिक शिक्षक
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प्रारंभिक साक्षरता और संख्यात्मकता के लिए आधारभूत वर्षों में खिलौना-आधारित शिक्षाशास्त्र

रोमिला सोनी
सह-आचार्य, प्रारंभिक शिक्षा विभाग, राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद, नई दिल्ली

Published 2026-07-13

How to Cite

सोनी र. (2026). प्रारंभिक साक्षरता और संख्यात्मकता के लिए आधारभूत वर्षों में खिलौना-आधारित शिक्षाशास्त्र. प्राथमिक शिक्षक, 46(3), p.74-84. https://ejournals.ncert.gov.in/index.php/pp/article/view/5573

Abstract

इस बात के पर्याप्‍त प्रमाण हैं कि खिलौनों से खेलना बाल विकास का एक बहुत ही महत्वपूर्ण पहलू है। सभी उम्र के बच्चे खिलौनों के साथ खेलने का आनंद लेते हैं और अपनी कल्पना और प्रत्‍यक्ष खेलों में, वे विभिन्न भूमिकाएँ निभाते हैं, लेकिन वास्‍तव में खिलौने साधारण खेलने की चीजों से कहीं अधिक हैं। खिलौने बच्‍चों को सीखने के ऐसे अवसर प्रदान करते हैं, जो बच्चों में बुनियादी कौशल पैदा कर सकते हैं और उन्हें अपने आगे के स्कूली जीवन के लिए लाभांवित कर सकते हैं।

खिलौने घरों में आमतौर पर बच्चों के पास होते ही हैं; फिर वे चाहे घर में उपलब्ध वस्तुएँ, जैसे— बर्तन, डिब्बे, देश में बने पारंपरिक खिलौने, ब्लॉक्स, पजल्स या कुछ भी हो, जिससे बच्चों का मनोरंजन हो सके। यह सभी खेल-खिलौने वास्तव में बच्चे के विकास के लिए महत्वपूर्ण होते हैं। इस लेख द्वारा हम जानेंगे कि खिलौनों के द्वारा बच्चे समाजीकरण करना, सोचना, समस्याओं को सुलझाना, नए-नए शब्‍दों का इस्‍तेमाल करना, छाँटना, जोड़े बनाना, परिपक्व होना और सबसे महत्वपूर्ण बात, यह सब खेल-खेल में करना सीखते हैं। खेल बच्चों को उनकी कल्पना, पर्यावरण, माता-पिता, परिवार और दुनिया से जोड़ते हैं। खिलौना-आधारित शिक्षा यानी कि खिलौनों द्वारा संकल्पना का विकास, विशेष तौर पर प्रारंभिक साक्षरता व संख्यात्मकता को सीखने के लिए एक अद्भुत और बोझ-रहित शिक्षा है।