Published 2026-07-13
How to Cite
Abstract
विद्यालय न केवल सीखने का स्थान होता है, बल्कि यह बच्चे के व्यक्तित्व के समग्र विकास के लिए अवसर प्रदान करता है। कोई भी शैक्षणिक संस्थान समाज से अलग रहकर काम नहीं करता है बल्कि समाज की सामाजिक-सांस्कृतिक प्रथाएँ, इसको प्रभावित करती हैं। भारतीय स्कूली शिक्षा प्रणाली में, प्रार्थना को शिक्षा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है और यह माना जाता है कि सीखने से पहले प्रार्थना करनी चाहिए। छात्रों के बीच अनुशासन और नैतिक मूल्यों को सुनिश्चित करने के लिए भी सुबह की सभा को महत्वपूर्ण माना जाता है। वर्तमान शोधपत्र अरुणाचल प्रदेश के विद्यालयों में सुबह की सभा की प्रथाओं का पता लगाने का एक प्रयास है। यह सुबह की सभा, प्रार्थना, शपथ ग्रहण की प्रक्रिया और उस पर शिक्षकों और छात्रों के विचारों का अध्ययन करता है। एक सुविधाजनक प्रतिचयन प्रक्रिया का उपयोग करके अरुणाचल प्रदेश के पापुमपारे जिले और राजधानी परिसर के 40 प्राथमिक विद्यालयों का नमूने के रूप में चयन किया गया था। आवृत्ति गणना और सामग्री विश्लेषण को लागू करके सूचना का विश्लेषण किया गया था। अध्ययन के आधार पर यह पाया गया कि अधिकांश विद्यालयों में प्रातःकालीन सभा का अभ्यास किया गया। सभा के दौरान विद्यार्थी, प्रार्थना, शपथ और राष्ट्रगान का अभ्यास करते हैं। कुछ निजी विद्यालय दिन के विचार का भी अभ्यास करते हैं। प्रार्थना के बोल संस्थाओं के प्रकार के अनुसार भिन्न होते हैं। प्रातःकालीन सभा पद्धतियों के प्रति विद्यार्थियों और शिक्षकों की राय सकारात्मक थी।