Published 2026-07-13
How to Cite
Abstract
सीखने के सामाजिक-सांस्कृतिक उपागम को केंद्र में रखते हुए यह शोधपत्र इस आधारभूत मान्यता पर आधारित है कि विद्यार्थी अपने सामाजिक-सांस्कृतिक परिवेश की विभिन्न संलग्नताओं में सक्रिय भागीदारी और अवलोकनों से जो सीखते हैं, वही उनके विचारों में प्रकट होता है। इन पर विद्यार्थियों के सामाजिक-सांस्कृतिक संदर्भ की गहरी छाप होती है। इसके आधार पर उनकी विश्व-दृष्टि का विकास होता है, जिसका प्रतिफल उनके निर्णय लेने, समस्या-समाधान करने और परस्पर संवाद करने में दिखाई देता है।
इस सैद्धांतिक मान्यता के अनुरूप प्रस्तुत लेख नगरीय और ग्रामीण विद्यार्थियों के भोजन विषयक विचारों की पड़ताल करता है। उक्त अवधारणा से संबंधित विद्यार्थियों के विचारों की व्याख्या करते हुए इस लेख में बताया गया है कि कैसे संदर्भजन्य घटनाओं और पदार्थों के साथ विद्यार्थियों की सघन और प्रत्यक्ष अंतःक्रिया उनके चिंतन को प्रभावित कर रही है। कौन-से सांस्कृतिक विश्वास उन्हें अपने परिवार और परिवेश में प्राप्त हो रहे हैं? अध्यापक पुस्तकों में दी गई अवधारणाओं की व्याख्या कैसे कर रहे हैं? मीडिया, समुदाय और जनसंचार माध्यमों में कौन-से उदाहरण, व्याख्याएँ और आख्यान उपस्थित हैं?