Published 2026-07-13
How to Cite
Abstract
भारत उन देशों की कतार में शामिल है जिन्हें वर्ष 2030 तक संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा निर्धारित एजेंडा 2030 के 17 सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करना है। इन लक्ष्यों में सभी के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा (लक्ष्य 4) को प्रमुखता से स्थान दिया गया है। एक बेहतर और टिकाऊ भविष्य प्राप्त करने के लिए इन लक्ष्यों को समय पर प्राप्त करना अत्यंत आवश्यक है।
भारत में 6 से 14 वर्ष की आयु के बच्चों को निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा प्रदान करने का प्रावधान शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 के रूप में अप्रैल 2010 से प्रभावी हुआ है। इससे भारत जैसे भौगोलिक और सांस्कृतिक विविधता वाले देश में बच्चों के लिए निःशुल्क प्राथमिक शिक्षा प्रदान करना संभव तो हुआ है, लेकिन शिक्षा की गुणवत्ता क्या हो, इस पर अभी भी बड़ा प्रश्नचिह्न है।
नेशनल अचीवमेंट सर्वे (2017) और असर (2018) की रिपोर्ट स्पष्ट रूप से हमें हमारी प्राथमिक शिक्षा प्रणाली की चिंताजनक स्थिति दिखाती है। भारत में गुणवत्तापूर्ण प्राथमिक शिक्षा प्रदान करने का प्रयास निरंतर जारी है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 ने इस मुद्दे की गंभीरता को समझते हुए कहा है कि हमें प्राथमिक शिक्षा की संरचना, पाठ्यक्रम और शिक्षाशास्त्र में बदलाव लाना चाहिए।
पेडागॉजिकल लीडरशिप का संप्रत्यय परंपरागत रूप से चली आ रही स्कूल लीडरशिप से भिन्न है। पेडागॉजिकल लीडरशिप शिक्षण और अधिगम के समर्थन से संबंधित है। इस लेख में पेडागॉजिकल लीडरशिप से संबंधित शोधों का गंभीरता से अध्ययन करने के पश्चात् शोधकर्ता ने यह समझाने का प्रयास किया है कि स्कूल की व्यवस्था (सेटिंग) में पेडागॉजिकल लीडरशिप का क्या अर्थ है और किस प्रकार पेडागॉजिकल लीडर गुणवत्तापूर्ण प्राथमिक शिक्षा प्रदान करने में सहायक होते हैं।