Vol. 49 No. 2 (2026): प्राथमिक शिक्षक
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शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के तहत निजी विद्यालयों में सामाजिक-आर्थिक रूप से वंचित बच्चों के लिए समावेशी शिक्षा के वातावरण का एक अध्ययन

वीरेन्द्र प्रताप सिंह
आचार्य, प्रारंभिक शिक्षा विभाग, राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (रा.शै.अ.प्र.प.), नई दिल्ली – 110016।
वीर अभिमन्यु कुमार
सह-आचार्य, प्रारंभिक शिक्षा विभाग, राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (रा.शै.अ.प्र.प.), नई दिल्ली – 110016।

Published 2026-07-13

How to Cite

सिंह व. प., & कुमार व. अ. (2026). शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के तहत निजी विद्यालयों में सामाजिक-आर्थिक रूप से वंचित बच्चों के लिए समावेशी शिक्षा के वातावरण का एक अध्ययन. प्राथमिक शिक्षक, 49(2), p.87-98. https://ejournals.ncert.gov.in/index.php/pp/article/view/5368

Abstract

शिक्षा का अधिकार (आर.टी.ई.) अधिनियम 2009, विशेष रूप से धारा 12(1)(सी), निजी विद्यालयों को सामाजिक-आर्थिक रूप से वंचित समूहों (एस.ई.डी.जी.) के बच्चों के लिए प्रवेश स्तर पर 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित करने का प्रावधान करता है, जिसका उद्देश्य शैक्षिक समानता को बढ़ावा देना है।

यह अध्ययन अधिनियम के प्रावधानों के तहत विद्यालयों में सामाजिक वातावरण पर पड़ने वाले प्रभाव का मूल्यांकन करता है और मध्य प्रदेश के निजी स्कूलों में समावेशी शिक्षा को प्रोत्साहित करने में आने वाली चुनौतियों और संभावनाओं को रेखांकित करता है।

इस उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए प्राथमिक आँकड़े मध्य प्रदेश से वर्ष 2023–2024 के दौरान एकत्र किए गए। इस संबंध में सीहोर और विदिशा जिलों के 30 विद्यालयों से 235 शिक्षकों का आँकड़ा संग्रह करते हुए शोध में पाया गया कि एस.ई.डी.जी. के बच्चों ने अकादमिक और पाठ्येतर गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग लिया।

इस अध्ययन के निष्कर्ष से ज्ञात होता है कि एस.ई.डी.जी. के बच्चे पढ़ाई और पाठ्येतर गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग लेते हैं, परंतु अभिभावकों की भागीदारी, संसाधनों की उपलब्धता और डिजिटल शिक्षा की चुनौतियाँ अभी भी बनी हुई हैं।

भेदभाव के न्यूनतम उदाहरण मुख्य रूप से समावेशी वातावरण का सुझाव देते हैं, फिर भी प्रशासकीय कमियाँ, जैसे कि विद्यालय समितियों में एस.ई.डी.जी. अभिभावकों का अल्पप्रतिनिधित्व, अभी भी मौजूद है।

अध्ययन शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डालता है और आर.टी.ई. अधिनियम के तहत समावेशी शिक्षा की प्रभावशीलता को बढ़ाने के लिए नीतिगत सिफारिशें प्रदान करता है।