Vol. 49 No. 3 (2026): प्राथमिक शिक्षक
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राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 एवं अध्यापक शिक्षा : एक समालोचनात्मक अध्ययन

निकिता श्रीवास्तव
शोध छात्रा, शिक्षा संकाय, बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी (उत्तर प्रदेश) – 221005
Bio
आनंद कुमार
प्राध्यापक, शिक्षा विद्यापीठ, श्री गुरु राम राय विश्वविद्यालय, देहरादून (उत्तराखंड) – 248001

Published 2026-07-13

How to Cite

श्रीवास्तव न., & कुमार आ. (2026). राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 एवं अध्यापक शिक्षा : एक समालोचनात्मक अध्ययन. प्राथमिक शिक्षक, 49(3), p.151-163. https://ejournals.ncert.gov.in/index.php/pp/article/view/5356

Abstract

यह लेख राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 एवं अध्यापक शिक्षा के संदर्भ में किए गए व्यापक सुधारों और उनके प्रभावों पर केंद्रित है।

उक्त लेख में अध्यापक शिक्षा की वर्तमान स्थिति का गहन विश्लेषण किया गया है, जिसमें वर्तमान प्रणाली की प्रमुख चुनौतियों जैसे प्रशिक्षण की गुणवत्ता में असमानता, व्यावहारिक अनुभव की कमी, तकनीकी ज्ञान की न्यूनता, पाठ्यक्रम की अप्रासंगिकता तथा नवाचार व शोध की उपेक्षा आदि पर विस्तार से चर्चा की गई है।

यह लेख राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एन.ई.पी.) 2020 द्वारा अध्यापक शिक्षा में प्रस्तावित प्रमुख सुधारों पर चर्चा करता है। इनमें चार वर्षीय एकीकृत शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम, बहुविषयक संस्थानों के अंतर्गत शिक्षक प्रशिक्षण, राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद द्वारा नवीन दिशानिर्देशों का निर्माण और तकनीक-सक्षम शिक्षण को प्रोत्साहन जैसी पहलों को सम्मिलित किया गया है।

नीति में शिक्षकों के सतत व्यावसायिक विकास, शिक्षण-अधिगम के परिणामों पर केंद्रित मूल्यांकन तथा नैतिक और मूल्य-आधारित शिक्षा को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है।

साथ ही, एन.ई.पी. 2020 की रूपरेखा को गहराई से विश्लेषित किया गया है, जिसमें शिक्षा प्रणाली को समावेशी, समानतामूलक, गुणवत्तापूर्ण, तकनीकी रूप से उन्नत और वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाने की दिशा में नीति की प्रतिबद्धताओं को दर्शाया गया है।

इस नीति के माध्यम से सरकार का उद्देश्य न केवल अध्यापक शिक्षा को सुदृढ़ करना है, अपितु नई पीढ़ी के शिक्षकों में ऐसी योग्यता और दृष्टिकोण विकसित करना है, जिससे वे 21वीं सदी की आवश्यकताओं के अनुरूप शिक्षा प्रदान कर सकें।

एन.ई.पी. 2020 भारतीय अध्यापक शिक्षा प्रणाली के कायाकल्प की दिशा में एक ऐतिहासिक और दूरदर्शी कदम है, जो शिक्षकों को अधिक सक्षम, नवोन्मेषी और मूल्य-आधारित बनाएगा।

इससे न केवल शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा, बल्कि समग्र राष्ट्रीय विकास की दिशा में भी सार्थक योगदान सुनिश्चित होगा।