Vol. 49 No. 3 (2026): प्राथमिक शिक्षक
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विद्यालयी शिक्षा में नेतृत्व : सर्वाधिक महत्वपूर्ण घटक

मीता गुप्ता
प्राचार्या, एस.सी.ई.आर.टी., राज्य शिक्षा केंद्र, मध्य प्रदेश – 462011

Published 2026-07-13

How to Cite

गुप्ता म. (2026). विद्यालयी शिक्षा में नेतृत्व : सर्वाधिक महत्वपूर्ण घटक. प्राथमिक शिक्षक, 49(3), p.127-136. https://ejournals.ncert.gov.in/index.php/pp/article/view/5354

Abstract

विद्यालयी शिक्षा में नेतृत्व एक अत्यंत महत्वपूर्ण घटक है, जो विद्यालय की शैक्षिक गुणवत्ता, वातावरण और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास को प्रभावित करता है।

एक कुशल नेतृत्वकर्ता सकारात्मक सोच, नवाचार, समावेशी दृष्टिकोण और सहभागिता पर आधारित कार्यशैली के माध्यम से विद्यालय को उत्कृष्टता की ओर अग्रसर करता है। प्राचार्य का प्रभावी नेतृत्व न केवल शिक्षकों और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को प्रेरित करता है, बल्कि विद्यार्थियों के अनुभवों, सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि और विकासात्मक आवश्यकताओं को समझते हुए एक सहयोगात्मक अधिगम संस्कृति विकसित करता है।

इस लेख में अच्छे लीडर के गुण, जैसे— खुलापन, कर्तव्यनिष्ठा, सहमतता, बहिर्मुखता, नवाचारशीलता, प्रेरक दृष्टिकोण आदि पर विस्तार से चर्चा की गई है।

साथ ही, नेतृत्व से संबंधित व्यावहारिक अनुभवों, समस्याओं के समाधान, सामुदायिक सहभागिता, वित्तीय प्रबंधन और समूह-निर्माण की रणनीतियों को भी रेखांकित किया गया है।

केस स्टडी के माध्यम से यह दर्शाया गया है कि प्रभावशाली नेतृत्व कैसे सामाजिक और भौतिक बाधाओं को पार कर विद्यालय में नवाचार और गुणवत्ता की स्थापना कर सकता है।

यह लेख विद्यालय प्रमुखों के लिए व्यावहारिक मार्गदर्शिका के रूप में उपयोगी सिद्ध होगा।