खंड 45 No. 1 -2 (2024): भारतीय आधुनिक शिक्षा
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राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के परिप्रेक्ष्य में सभी के लिए अधिगम

तबस्सुम जहाँ
शोधार्थी, लखनऊ विश्वविद्यालय, बाबूगंज, हसनगंज, लखनऊ, उत्तर प्रदेश – 226007
सना आफ़ताब
शोधार्थी, लखनऊ विश्वविद्यालय, बाबूगंज, हसनगंज, लखनऊ, उत्तर प्रदेश – 226007

प्रकाशित 2026-07-14

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सार

यह शोध-पत्र राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अध्याय 6 में वर्णित ‘समतामूलक तथा समावेशी शिक्षा — सभी के लिए अधिगम’ की अवधारणा को प्रस्तुत करता है। इसमें सभी वर्गों के लिए समान शिक्षा की उपयुक्तता पर बल दिया गया है, विशेषकर उन समूहों के लिए जो किसी न किसी कारणवश शिक्षा प्राप्त करने में असमर्थ रहे हैं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि वे सामान्य विद्यार्थियों के साथ बिना किसी झिझक के शिक्षा प्राप्त कर सकें।

इस शोध-पत्र में वंचित समूहों की आवश्यकताओं तथा उनके लिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में किए गए प्रावधानों का विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है। साथ ही, नव भारत साक्षरता कार्यक्रम के अंतर्गत ‘उल्लास’ नामक प्रवेशिका के माध्यम से प्रौढ़ वर्ग की बुनियादी साक्षरता एवं संख्याज्ञान को विकसित करने तथा जीवनोपयोगी कौशलों को सिखाने पर विशेष बल दिया गया है।

इस शोध-पत्र में आँकड़ों का संकलन द्वितीयक स्रोतों से किया गया है। यू-डाइस प्लस (UDISE+) 2021–22 से प्राप्त आँकड़ों के आधार पर भारतीय विद्यालयों की वर्तमान स्थिति को स्पष्ट किया गया है, जो शिक्षकों एवं विद्यार्थियों के लिए मार्गदर्शन प्रदान करते हैं। इन आँकड़ों के आधार पर शिक्षक अपनी कक्षाओं में नवीन अधिगम सामग्रियों का प्रयोग कर विद्यार्थियों की शैक्षिक उपलब्धियों को बढ़ा सकते हैं।

शोध-पत्र में यह भी रेखांकित किया गया है कि प्राथमिक स्तर पर उच्च सकल नामांकन अनुपात को माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक स्तर तक बनाए रखने के लिए विद्यालयों और शिक्षकों को निरंतर प्रयासरत रहना चाहिए। इससे अपव्यय एवं अवरोधन जैसी समस्याओं में कमी आएगी। साथ ही समाज भी इन वर्गों के प्रति अधिक संवेदनशील बनेगा और सभी वर्गों का समान रूप से उत्थान संभव हो सकेगा