खंड 45 No. 1 -2 (2024): भारतीय आधुनिक शिक्षा
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समावेशी शिक्षण-अधिगम में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की भूमिका : राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के संदर्भ में

शालिनी अग्रवाल
सहायक आचार्य, बलराम कृष्ण अकादमी, मोहनलालगंज, लखनऊ, उत्तर प्रदेश – 226301

प्रकाशित 2026-07-14

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सार

शैक्षिक प्रणाली में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस — ए.आई.) के एकीकरण ने विविध क्षमताओं वाले व्यक्तियों के लिए सीखने के परिदृश्य को परिवर्तित कर दिया है। जैसे-जैसे प्रौद्योगिकी तीव्र गति से विकसित हो रही है, यह आवश्यक हो गया है कि सभी शिक्षार्थियों की आवश्यकताओं को पूरा करने तथा समावेशी शिक्षण वातावरण निर्मित करने में ए.आई. की भूमिका को समझा जाए।

समावेशी शिक्षा का उद्देश्य दिव्यांग विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करने तथा शैक्षणिक एवं सामाजिक गतिविधियों में पूर्ण सहभागिता के समान अवसर प्रदान करना है। वैयक्तिकृत शिक्षण प्लेटफ़ॉर्म, अनुकूली मूल्यांकन तथा आभासी वास्तविकता सिमुलेशन जैसे ए.आई. आधारित उपकरणों के माध्यम से शिक्षक विभिन्न शिक्षण शैलियों एवं क्षमताओं वाले विद्यार्थियों की व्यक्तिगत आवश्यकताओं को बेहतर ढंग से पूरा कर सकते हैं।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता के अनुप्रयोग द्वारा शिक्षकों को विद्यार्थियों में महत्वपूर्ण चिंतन कौशल, समस्या-समाधान क्षमता तथा डिजिटल साक्षरता विकसित करने में सहायता मिल सकती है। इससे यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि ज्ञान और शैक्षणिक सफलता की प्रक्रिया में कोई भी शिक्षार्थी पीछे न रह जाए।

ए.आई. के उपयोग से समावेशी शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन संभव है। यह तकनीक अधिगम प्रक्रिया को अधिक सरल, सुलभ और सुविधाजनक बना सकती है, जिससे विद्यार्थियों के बीच की शैक्षिक असमानताओं को कम किया जा सके। सामाजिक न्याय और प्रगति की दिशा में ए.आई. का प्रभावी उपयोग करके समर्पित, सक्षम और संवेदनशील नागरिकों का निर्माण किया जा सकता है।