Vol. 45 No. 1 -2 (2024): भारतीय आधुनिक शिक्षा
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बुनियादी साक्षरता में बहुभाषिकता का महत्व एवं विकास : चुनौतियाँ एवं संभावनाएँ

नेहा गोस्वामी
अतिथि प्राध्यापक, डॉ. बी. आर. अंबेडकर विश्वविद्यालय दिल्ली, दिल्ली – 110006

Published 2026-07-14

How to Cite

गोस्वामी न. (2026). बुनियादी साक्षरता में बहुभाषिकता का महत्व एवं विकास : चुनौतियाँ एवं संभावनाएँ. भारतीय आधुनिक शिक्षा, 45(1 -2), p.7-21. https://doi.org/10.64742/e5b61394

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Abstract

वर्तमान समय में प्रत्येक व्यक्ति बेहतर अवसरों की तलाश में एक स्थान से दूसरे स्थान पर आवागमन कर रहा है, जिससे बहुसांस्कृतिकता एवं बहुभाषिकता का तीव्र विकास हुआ है। प्राथमिक स्तर पर शिक्षण-अधिगम के लिए मातृभाषा के प्रयोग पर अधिक बल दिए जाने के कारण बहुभाषिकता के महत्व को सामान्यतः अनदेखा कर दिया जाता है। सामान्यतः किसी भी बच्चे के मस्तिष्क का लगभग 85 प्रतिशत विकास 6 वर्ष की आयु तक हो जाता है, इसलिए उसके प्रारंभिक वर्ष अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं।

विभिन्न शोधों के अनुसार 2 से 8 वर्ष तक की आयु के बच्चे भाषाएँ बहुत जल्दी सीख लेते हैं तथा बहुभाषिकता से इस आयु वर्ग के विद्यार्थियों को संज्ञानात्मक लाभ प्राप्त होता है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 भी बुनियादी साक्षरता को प्राथमिकता देने पर बल देती है। इसी अवधि में बच्चों का भाषिक विकास अत्यंत तीव्र गति से होता है। भाषा संबंधी अधिकांश शोध स्पष्ट करते हैं कि जो बच्चे दो या दो से अधिक भाषाएँ अपने आसपास सुनते और बोलते हुए बड़े होते हैं, उनका संज्ञानात्मक, सामाजिक एवं भावनात्मक विकास अपेक्षाकृत बेहतर होता है।

ऐसी स्थिति में यह प्रश्न महत्वपूर्ण हो जाता है कि बुनियादी स्तर पर बहुभाषिकता को किस प्रकार एक संसाधन के रूप में प्रयोग किया जाए, ताकि बच्चों के विकास में सहायता मिल सके। साथ ही, जब शिक्षक कक्षा में बहुभाषिकता का प्रयोग करने का प्रयास करते हैं, तब उन्हें किन चुनौतियों का सामना करना पड़ता है तथा वे उन चुनौतियों से किस प्रकार जूझते हैं।

इन्हीं प्रश्नों के उत्तर खोजने के उद्देश्य से यह शोध-पत्र राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020, राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा 2022 तथा राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा 2023 के आलोक में बुनियादी साक्षरता में बहुभाषिकता के महत्व, उसकी चुनौतियों एवं संभावनाओं पर विचार-विमर्श प्रस्तुत करता है। यह नीति एवं पाठ्यचर्या प्रारंभिक स्तर से ही बच्चों को विभिन्न भाषाओं के संपर्क में लाने को महत्वपूर्ण मानती है तथा बहुभाषिकता को बढ़ावा देने के साथ-साथ शिक्षकों से द्विभाषी शिक्षण की अपेक्षा भी करती है, ताकि बच्चे भाषा को प्रभावी ढंग से सीख सकें।